tarkeshkumarojha

Just another weblog

234 Posts

106 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 14530 postid : 778077

'बयान- वीर' नेताओं की वीरता... !!

Posted On: 29 Aug, 2014 social issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

‘बयान- वीर’ नेताओं की वीरता… !!

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ राजनैतिक पार्टी तृणमूल कांग्रेस के एक विधायक को अचानक ज्ञानोदय हुआ कि इस धरा पर बलात्कार तो तब से हो रहे हैं, जब से यह सृष्टि बनी है। उनके मुताबिक बलात्कार पहले भी होते रहे हैं , आज भी हो रहे हैं और भविष्य में भी होते रहेंगे। जब तक यह पृथ्यी है बलात्कार होते रहेंगे। दुष्कर्म पर बिल्कुल मौलिक विचार व्यक्त करने के दौरान विधायक जी यही नहीं रुके। उन्होंने यहां तक कह दिया कि आज महिलाएं किसी के साथ सात – आठ साल तक रहती है। जब तक पैसे मिलते रहते हैं सब ठीक, पैसे मिलने बंद हुए कि शिकायत करने लगती हैं कि उसके साथ फलां व्यक्ति इतने सालों से बलात्कार करता आ रहा है। अभिजीत मुखर्जी व तापस पाल परंपरा को आगे बढ़ाए दीपक हलधर नामक यह विधायक काफी आगे बढ़ गए। अब देखना है कि इनकी अमृतवाणी राजनीति में क्या गुल खिलाथी है। मेरे कुछ निकट संबंधी एेसे हैं जिनकी जुबान चुप रहने वाली जगहों पर कैंची की तरह चलती है, लेकिन जहां नौबत अनिवार्य रूप से बोलने कि आई कि वे ‘ एक चुप – हजार चुप’ वाली मुद्रा अख्तियार कर लेते हैं। हमारे राजनेताओं की हालत भी कुछ एेसी ही है। उनकी बयान – वीरता का आलम यह कि बेहद नाजुक मसलों पर भी वे बोले बिना नहीं रह पाते। लव जेहाद का मसला भी कुछ एेसा ही है। मेरठ से लेकर रांची तक की घटना बेहद चिंताजनक मानी जानी चाहिए। क्योंकि सीधे तौर पर यह कोई अंतरजातीय या धर्मीय प्रेमं विवाह का नहीं , बल्कि अक्षम्य धोखाधड़ी का मामला है। लेकिन हमारे राजनेता कैसे चुप रह सकते हैं। सो बगैर सोचे – समझे इस नाजुक मसले पर भी रुटीन बयान देना शुरू कर दिया। मानो यह कोई मसला ही नहीं है। शरारती तत्व बेवजह बात का बतंगड़ बना रहे हों। कुछ राजनेताओं ने शाहनवाज हुसैन , मुख्तार अब्बास नकवी और सुब्रमयणम स्वामी की पत्नियों का जिक्र करते हुए रांची प्रकरण को सही ठहराने की बेशर्म कोशिश की। जबकि इन सभी ने दूसरे धर्म की महिलाओं से प्रेम विवाह किया। उसके साथ धोखाधड़ी करके शादी नहीं की , न ही शादी के बाद उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। इस तराजू पर रख कर मेरठ औऱ रांची प्रकरण को तुच्छ घटना बताने की कोशिश की गई। लेकिन सचमुच क्या एेसा है। किसी भी लड़की को यदि धोखे में रख कर औऱ समान धर्म बता कर पहले उससे शादी की जाए, और चंद दिनों बाद ही उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला जाए, तो क्या इसे नजरअंदाज कर देना चाहिए। क्या यह एक लड़की की जिंदगी , उसके अस्तित्व और समूचे परिवार के साथ भयंकर धोखाधड़ी नहीं है। यदि यही घटना विपरीत परिस्थितयों में हुई होती तो क्या तब भी हमारे नेता चलताऊ बयान देते। हिंदू नाम वाले मेरे कई परिचितों ने बगैर नाम बदले ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। वे क्रिसमस पर हमें केक खिलाते हैं, और हम उन्हें बधाई देते हैं। क्योंकि इसमें गलत कुछ भी नहीं है। यदि कोई स्वेच्छा से किसी धर्म को स्वीकार करता है तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता है। लेकिन यदि धर्म परिवर्तन जोर – जबरदस्ती या लालच देकर कराया जाए तो इस पर आखिर आपत्ति क्यों नहीं होनी चाहिए। लव जेहाद का मसला भी कुछ एेसा ही है। सामान्य प्रेम प्रसंगों के विपरीत यदि नियोजित तरीके और धोखे से एक खास धर्म की लड़कियों से पहले शादी और बाद में उसका धर्म परिवर्तन कराया जाए तो इसका जोरदार विरोध होना ही चाहिए।

Web Title : 'बयान- वीर' नेताओं की वीरता... !!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
August 30, 2014

श्री तारकेश ओझा जी, रांची की घटना बेहद शर्मनाक है,उससे ज्यादा शर्मनाक है .. एक मजिस्ट्रेट द्वारा उस अपराधी को भागने में मदद करना और कुछ सरकरी तंत्रों द्वारा संरक्षण. न्याय तो होना चाहिए पर कब मिलेगा न्याय ? अब तक कितनों को न्याय मिला है.? और कित्तने दिनों में न्याय मिला है. हम सब ख़बरें देखते सुनते है जब तक मीडिया में चलता रहता है उसके बाद? फिर बी मैं तारा की प्रशंशा करता हूँ कि वह बहादुरी से अपना बयान दर्ज करा रही है उसे न्याय milana चाहिए और रंजीत उर्फ़ रक़ीबुल को कठोरतम सजा….एक बात और किसी प्रगतिशील नवयुवक को आगे आकर तारा का हाथ थामने की भी पहल करनी चाहिए ….ये कुछ मेरे विचार हैं.


topic of the week



latest from jagran