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रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!

Posted On 22 Mar, 2016 Politics में

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रंगहीन दुनिया में राहु – केतु …!!
तारकेश कुमार ओझा
जब पहली बार खबर सुनी कि पाकिस्तान में एक खेल प्रेमी को इसलिए गिरफ्तार कर लिया गया क्योंकि वह विराट कोहली का बड़ा प्रशंसक था और अनजाने में उसने अपने घर पर भारत का झंडा फहरा दिया तो मेरा माथा ठनका और अनिष्ट की आशंका होने लगी। क्योंकि अरसे से मैं यही देखता – सुनता आ रहा हूं। भारत – पाकिस्तान के बीच अद्भुत संयोग के रूप में अच्छी और बुरी ताकतें हमेशा अदृश्य रूप में सक्रिय रहती है कि अवाक रह जाना पड़ता है। दोनों के रिश्तों पर पता नहीं कौन से ग्रह मंडराते रहते हैं। ऐसा तो छात्र जीवन में हमारा सामना अक्सर जटिल प्रश्न पत्रों से पड़ता रहता था, जिसमें एक सवाल सरल तो दूसरा अत्यंत कठिन होता था। या किसी पांत में खाने बैठे हो तो परोसने वाला एक आइटम पसंद वाली परोसे तो इसके फौरन बाद नापसंद वाली। 90 के दशक में अपने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए तो इसके कुछ दिन बाद ही कारगिल पर हमला हो गया। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान के अपने समकक्ष नवाज शरीफ की नातिन की मेहंदी रस्म में उपस्थिति दर्ज कराने गए तो पठानकोट पर हमला हो गया। लिहाजा कोहली प्रशंसक का कारनामा सामने आते ही मेरी आंख फड़कने लगी और देखिए क्या संयोग कि कुछ दिन बाद अपने ही देश के विश्वविद्यालय में ऐसे – ऐसे देश विरोधी नारे सुनने को मिले कि कलेजा बैठने को हुआ। क्योंकि वहां संसद पर हमले में शहीद होने वाले जवानों की नहीं बल्कि षडय़ंत्र में मददगार की भूमिका के चलते फांसी पर लटकाए गए आरोपी की बरसी मनाई जा रही थी। हम लेकर रहेंगे आजादी… जो तुमने नही दिया तो हम छीन कर लेंगे आजादी…। आजादी के नारे ऐसे लगाए जा रहे थे मानो हम अंग्रेजों के जमाने में लौट गए हों। ऐसा तो उस दौर की फिल्मों में ही देखा था। जिसमें शहीद की भूमिका निभाने वाले नायक अंग्रेजी हुकूमत के सामने आजादी के नारे बुलंद करते रहते। भारत – पाकिस्तान के बीच इन विचित्र संयोगों के मद्देनजर मुझे तो कभी – कभी लगता है कि दोनों मुल्कों के बीच पता नहीं कौन – कौन ग्रह चक्कर लगाते रहते हैं कि पाकिस्तान में जैसे ही एक भारतीय के प्रशंसक का पता चला कि अपने देश में पाकिस्तान के सैकड़ों दीवाने पैदा हो गए। अक्सर इसके उलट तस्वीर भी देखने को मिलती है। अक्सर सीमा पर इतनी गोलियां बरसती है कि लगता है अब दोनों देश फरिया कर ही मानेंगे लेकिन तभी पता लगता है कि अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का पड़ोसी देश में जबरदस्त स्वागत हो रहा है। या पड़ोसी देश के डेलीगेशन को अपने देश में सिर – आंखों पर बिठाया जा रहा है। हाल में अपने देश में बहस शुरू हुई कि किसी को भारत – माता की जय कहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता । चैनलों पर रोज इस पर जोरदार बहस देख – सुन बेचैनी होती है और सोचना पड़ता है कि हमारे राजनीतिक राजनीति के स्तर को किस स्तर तक ले जा सकते हैं। किसी दिन किन्हीं लोगों को पता नहीं क्या – क्या आपत्तिजनक लगेगा कहना मुश्किल है। खैर राजनीति से इतर क्रिकेट के मैच में भारत ने पाकिस्तान की टीम को धो डाला तो सारा देश खुशी से झूम उठा। लेकिन इस बीच फिर खबर आई कि इतनी बड़ी सफलता के बावजूद टीम इंडिया के कप्तान की पत्नी खुश नहीं है क्योंकि मैच के बाद प्रशंसकों ने रांची में उनके घर के सामने खूब हुड़दंग किया। इस बीच पड़ोसी देश से एक और अच्छी खबर आई है कि पाकिस्तान सरकार ने पहली बार होली पर सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। दिल चाहता है कि ग्रहों का चक्कर और शह और मात का यह खेल यहीं रुक जाए।अरसे बाद मिली इस अच्छी खबर पर विडंबनाओं के राहु – केतु की छाया भी न पड़े।

इनलाइन चित्र 3

Web Title : रंगहीन दुनिया में राहु - केतु ...!!

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jlsingh के द्वारा
March 23, 2016

एक सच्चे भारतीय या देश भकत का दिल धड़कता है तभी भारत का स्वाभिमान जिन्दा है आदरणीय तारकेश्वर ओझा जी. … आपने एक शब्द का प्रयोग किया ”फ़रिया” लेंगे … यह शब्द तो बिहार के ग्रामीण अंचलों में खूब प्रचलित है. दूसरी बात क्रिकेट की कर लें तो हमें लगता है एक क्रिकेट के नाम पर ही देश भक्ति जम कर उभरती है अपने देश में. …सादर!


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